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RTE पर सख्ती: 25% गरीब बच्चों का दाखिला नहीं लिया तो निजी स्कूलों पर लगेगा भारी जुर्माना
- Repoter 11
- 09 Apr, 2026
बिहार में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा, EWS बच्चों के दाखिले से इनकार पर 1 लाख तक जुर्माना.
पटना/आलम की खबर:बिहार में अब शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह के बच्चों को 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश देने से इनकार करने वाले निजी विद्यालय अब सीधे दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आएंगे। शिक्षा विभाग ने जिलों को निर्देश जारी कर यह साफ कर दिया है कि आरटीई के प्रावधानों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी होगी।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कई निजी स्कूल, सरकारी मान्यता मिलने के बावजूद, आरटीई के तहत निर्धारित गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने में टालमटोल करते हैं या फिर तरह-तरह की बाधाएं खड़ी करते हैं। अब विभाग ने ऐसे स्कूलों को साफ संदेश दिया है कि शिक्षा का अधिकार कोई औपचारिक नियम नहीं, बल्कि लागू करने योग्य कानूनी दायित्व है। यानी यदि किसी विद्यालय ने आरक्षित सीटों पर नामांकन नहीं लिया, तो उसे केवल चेतावनी देकर नहीं छोड़ा जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, अगर कोई निजी विद्यालय पहली बार आरटीई प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर योग्य बच्चों का दाखिला लेने से इनकार करता है, तो उस पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यदि वही विद्यालय दूसरी बार भी नियमों की अवहेलना करता है, तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी जाएगी। वहीं, गंभीर और लगातार उल्लंघन की स्थिति में यह दंड और सख्त हो सकता है। इससे साफ है कि सरकार अब सिर्फ अपील या सलाह के भरोसे नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव और कानूनी कार्रवाई के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित कराना चाहती है।
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अब निजी विद्यालय प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बच्चों या अभिभावकों की ‘स्क्रीनिंग’ भी नहीं कर सकेंगे। यानी नर्सरी या कक्षा एक में नामांकन के लिए किसी भी बच्चे का इंटरव्यू, टेस्ट, मौखिक मूल्यांकन या किसी तरह की चयन प्रक्रिया लेना नियमों के खिलाफ माना जाएगा। कई स्कूलों में यह शिकायत आम रही है कि आरटीई श्रेणी के बच्चों को प्रवेश देने से पहले ‘योग्यता’ या ‘परिवार की पृष्ठभूमि’ के नाम पर सवाल-जवाब किए जाते हैं। सरकार ने इस पर भी सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि यदि किसी स्कूल ने लाभुक वर्ग के बच्चे से साक्षात्कार या टेस्ट लिया, तो उस पर भी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
शिक्षा विभाग के निर्देशों में बिना स्वीकृति या मान्यता के प्रारंभिक विद्यालय संचालित करने के मामले को भी गंभीर उल्लंघन माना गया है। ऐसे किसी व्यक्ति, संस्था या स्कूल प्रबंधन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, यदि तय समयसीमा के बाद भी बिना स्वीकृति विद्यालय चलाया जाता रहा, तो प्रतिदिन 10-10 हजार रुपये की दर से जुर्माना वसूला जाएगा। यह प्रावधान उन स्कूलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है जो नियमों के बिना या अधूरी प्रक्रियाओं के साथ संचालन करते रहे हैं।
इस पूरे मामले में प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर की ओर से सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान) को स्पष्ट निर्देश भेजे गए हैं। जिलों को कहा गया है कि वे निजी स्कूलों की नामांकन प्रक्रिया, आरक्षित सीटों की स्थिति और मान्यता संबंधी कागजात की निगरानी करें। यानी अब यह जिम्मेदारी केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला स्तर पर भी स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जिलों में निरीक्षण, शिकायत सत्यापन और नामांकन रिकॉर्ड की जांच भी तेज हो सकती है।
यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो आर्थिक तंगी के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं, लेकिन निजी स्कूलों की शर्तों, अनदेखी या मनमानी के कारण पीछे रह जाते हैं। आरटीई कानून का मूल उद्देश्य यही है कि गरीब और सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर मिल सके। ऐसे में सरकार की यह सख्ती सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम पहल के रूप में देखी जा रही है।
हालांकि, अब असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। क्योंकि कानून और निर्देश पहले भी मौजूद रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनकी प्रभावी निगरानी अक्सर कमजोर रही है। अगर जिला स्तर पर स्कूलों की सूची, दाखिला स्थिति, शिकायत निवारण और दंड प्रक्रिया को गंभीरता से लागू किया गया, तो यह फैसला निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने में बड़ा असर डाल सकता है। आने वाले नामांकन सत्र में यह साफ हो जाएगा कि सरकारी सख्ती का असर निजी विद्यालयों के रवैये पर कितना पड़ता है।
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